Saturday, 1 April 2017

प्यारी रौनक

प्यारी रौनक! कमी तुम्हारी,
नहीं भरेगी सदा खलेगी।
चुंबन पर प्रसन्न हो जाना,
ध्यान आकर्षण सब का करना,
अन्तर में छवि बनी रहेगी।
इस जीवन का कष्ट बड़ा था,
बांट नहीं पाता था कोई,
फिर भी तत्पर थे सब अपने,
रहो प्रसन्न यत्न करते थे।
अब तुम हो गयी हो ओझल,
देख नहीं पाएंगे तुम को!
कष्ट बड़ा है, पर है विवशता,
विधी विधान अपना करते हैं।
श्रद्धा पुष्प भेंट कर अपने,
ईश्वर से हम करें प्रार्थना,
नवजीवन यदि मिले तुम्हें तो,
यही जुड़ाव बनाए रखना।

1 comment:

  1. You have a great blog and so congratulate to you for helping people. With the you are a candidate to win with your website or blog, promote your web page, win prizes and promotions. With the support of our sponsors via we organize our blog competition for the first time in 2017. You can learn more about participation from our website.
    You can join, the applications are ongoing.

    Web :
    Mail :
    Pbx : +911194802050