Wednesday, 25 October 2017

माँ

पल-पल याद तुम्हारी आती।
एक क्षण को भी भूल ना पाती।।
माँ तुम मेरा साहस हो,
मैं मधुर बनूँ तुम वह रस हो,
जीवन का हो आधार तुम्ही,
मैं मोती हूँ तुम सीपी हो,
होकर मैं दूर ना दूर हुई,
पर मिलने से मजबूर हुई,
मिली पहचान मुझे तुमसे,
तुम्ही बनी सूख-दुख की साथी।।
पल-पल याद तुम्हारी आती।
एक क्षण को भी भूल ना पाती।।
पुत्री होना बड़ी बात है,
मर - मरकर जीना होता है,
मन हो या ना हो फिर भी,
कर्तव्यों को ढोना होता है,
बिना तुम्हारे प्रोत्साहन के
मैं जीवन मे क्या कर पाती?
पल-पल याद तुम्हारी आती।
एक क्षण को भी भूल ना पाती।।
मन करता है साथ रहूं मैं,
जीवन की सब सीखें ले लूँ,
पर पुत्री का भाग्य कहाँ यह?
कुछ पल को भी साथ रह सकूँ,
अप्रत्यक्ष रूप से फिर भी,
कृपा आपकी सदा रही है,
इसी लिए जीवन की परीक्षा,
देख नहीं मै कभी घबराती।।
पल-पल याद तुम्हारी आती।
एक क्षण को भी भूल ना पाती।।

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